• September 26, 2022
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दिल्ली सरकार ने बच्चों को सैनिक स्कूल की सौगात दी है। मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने शनिवार को पश्चिमी दिल्ली के झड़ौदा कलां में शहीद भगत सिंह आर्म्ड फोर्सेज प्रिपेटरी स्कूल का उद्घाटन किया। यह दिल्ली का पहला सैनिक स्कूल है। यह दिल्ली बोर्ड ऑफ एजुकेशन से संबद्ध है। इसमें नौवीं व ग्यारवीं में प्रवेश लिया जा सकेगा। पूरी तरह से नि:शुल्क इस स्कूल में छात्र पढ़ाई के साथ-साथ सेना में भर्ती की तैयारी कर सकेंगे। अब तक दिल्ली में सेना की तैयारी कराने के लिए कोई स्कूल नहीं था।

शहीद भगत सिंह आर्म्ड फोर्सेज प्रिपरेटरी स्कूल में बच्चों को राष्ट्रीय रक्षा अकादमी (नेशनल डिफेंस अकेडमी) नेवी, एयरफोर्स में भर्ती होने के लिए प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसमें प्रशिक्षण देने के लिए आर्मी के सेवानिवृत्त अफसरों को बुलाया जाएगा। उद्घाटन के अवसर पर मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कहा कि अब दिल्ली के गरीब परिवार के बच्चे भी सेना में अधिकारी बनकर देश की सेवा कर सकेंगे। यह स्कूल स्टेट ऑफ ऑर्ट फैसिलिटी से युक्त है, जो बड़े-बड़े स्कूलों में भी नहीं होती।

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Sainik School Society

उन्होंने कहा कि स्कूल में बच्चों को ऑफिसर के गुण सिखाने के साथ-साथ साइकोमेट्रिक टेस्ट, ग्रुप टॉस्क, मॉक इंटरव्यू और व्यक्तित्व का विकास किया जाएगा। सेना से जुड़े जितने एंट्रेस एग्जाम हैं, उन सबकेलिए बच्चों को तैयार किया जाएगा। केजरीवाल ने बच्चों से कहा कि स्कूल का नाम शहीद भगत सिंह पर इसलिए रखा गया है, ताकि उनसे हर बच्चे को प्रेरणा मिले।
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इस मौके पर मुख्य अतिथि सीएम अरविंद केजरीवाल को स्कूल के बच्चों ने गार्ड ऑफ ऑनर दिया। इसके बाद नाम पट्टिका का अनावरण किया गया। सीएम अरविंद केजरीवाल सर्विस प्रिपरेटरी विंग में गए और वहां बच्चों से बात की और फिर गल्र्स हॉस्टल को देखा। मुख्यमंत्री ने अकेडमिक ब्लॉक के सामने लॉन में पौधारोपण किया और कैडेट मेस का भी दौरा किया। इस समारोह में बच्चों के साथ करीब 200 अभिभावकों ने भी हिस्सा लिया। समारोह के दौरान उपमुख्यमंत्री एवं शिक्षा मंत्री मनीष सिसोदिया, नजफगढ़ के विधायक व परिवहन मंत्री कैलाश गहलोत और शिक्षा विभाग के सचिव समेत अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।

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दो साल पहले देखा सपना पूरा हुआ

केजरीवाल ने कहा कि हमने दो साल पहले सोचा था कि दिल्ली के अंदर कोई सैनिक स्कूल नहीं है, जो उनको सेना में भर्ती के लिए तैयार कर सके। बहुत सारे बच्चे अपने से फौज में जाते थे। बहुत सारे बच्चे  एनडीए समेत अलग-अलग परीक्षाओं की तैयारी करते थे। दिल्ली के अंदर सैनिक स्कूल होना चाहिए। एक साल पहले हमने इसकी तैयारी शुरू की। उम्मीद नहीं थी कि एक साल के अंदर यह बनकर तैयार हो जाएगा।

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