• September 26, 2022
Janmashtami Kab Hai 2022:
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Janmashtami Kab Hai 2022: Janmashtami का त्योहार पूरे देश में धूम धाम से मनाया जाता है. आप सभी लोग जानते हैं कि Janmashtami का त्योहार भगवान कृष्ण के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाते हैं।

Janmashtami Kab Hai 2022:

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लेकिन क्या आप जानते हैं कि यह जन्माष्टमी का त्योहार कब मनाया जाता है और Janmashtami Kab Hai? 2022

Janmashtami Kab Hai 2022Janmashtami Kab Hai 2022

 इसके बारे में आपको कोई जानकारी है। अगर नहीं है तो आज की पोस्ट में हम आपको बताने जा रहे हैं कि Janmashtami Kab Hai 2022 इसके बारे में विस्तार पूर्वक जानकारी इस लेख में….

JanmashtamiJanmashtami Kab Hai 2022 Kab Hai? 2022

आप सभी लोग बहुत अच्छे से जानते हैं कि अभी रक्षाबंधन के त्यौहार पर तिथियों को लेकर बहुत मतभेद हुए थे और रक्षाबंधन का त्यौहार 2 दिन तक मनाया गया था।

 इसी तरह से जन्माष्टमी को लेकर भी पंचांग में अलग – अलग तरह की तिथियां बताई जा रही है। 

वैसे तो भगवान कृष्ण का जन्म भाद्रपद कृष्ण पक्ष की अष्टमी को रोहिणी नक्षत्र में रात को 12:00 बजे असर अर्ध रात्रि में हुआ था। 

इस बार भाद्रपद मास की अष्टमी 2 दिन तक रहेगी अष्टमी तिथि का प्रवेश 18 अगस्त 2022 को रात्रि में हो रहा है। इसलिए बहुत से लोग तो 18 अगस्त को ही जन्माष्टमी का व्रत रख लेंगे। 

लेकिन ज्योतिष की अगर मानें तो हिंदू धर्म में उदया तिथि को सर्वोपरि माना गया है अर्थात और उदिया तिथि सर्व श्रेष्ठ होती है। इसलिए 19 अगस्त के दिन जन्माष्टमी का व्रत बहुत से लोग रखेंगे। वैष्णव संप्रदाय में भी 19 अगस्त को ही जन्माष्टमी महोत्सव मनाया जाएगा।

Dono Tithiyo Me Rahega Rohini Nakshatra

Janmashtami और कृष्ण जन्मोत्सव में एक ही चीज सर्वमान्य रखती है, और वह है रोहिणी नक्षत्र जिसमें कृष्ण भगवान का जन्म हुआ था। रोहिणी नक्षत्र में ही भगवान कृष्ण के जन्मोत्सव मनाने की परंपरा आदिकाल से अर्थात भगवान कृष्ण के जन्म से ही चली आ रही है।

इस बार अष्टमी तिथि 18 अगस्त और 19 अगस्त को रहेगी लेकिन रोहिणी नक्षत्र की अगर बात की जाए तो रोहिणी नक्षत्र 20 अगस्त को 1:53 पर प्रवेश करेगा।

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Janmashtami Ka Muhurat Kab Hai?

Janmashtami ka shubh muhurt or yog

जन्माष्टमी तिथि का अभिजीत मुहूर्त 18 अगस्त को 12:05 से शुरू होकर दोपहर 12:56 तक रहेगा।

वृद्धि योग – 17 अगस्त को शाम 8:56 से लेकर 18 अगस्त को शाम 8:41 होगा।

ध्रुव योग 18 अगस्त को शाम 8:41 से लेकर 19 अगस्त को 8:59 तक रहेगा।

Janmashtami Ki Puja Kaise Karen

Krishna janmastami ki pooja vidhi

कृष्ण जन्माष्टमी पर भगवान श्री कृष्ण का पूजन और श्रंगार करने के लिए अष्टगंध का चंदन,  अक्षत, रोली का तिलक लगाएं। सबसे पहले भगवान श्री कृष्ण को पंचामृत से स्नान करवाएं।

उसके बाद उनको वस्त्र आ भूषण पहना कर अच्छे से तैयार करें। फिर उनका श्रंगार करके माखन मिश्री का भोग लगाए इस पूजा में काले या सफेद रंग की किसी भी चीज का प्रयोग नहीं करनी चाहिए और सच्चे मन से भगवान की आरा धना करनी चाहिए।

Janmashtami Kyu Manate Hai? In Hindi

Janmashtami kyu manayi  jati hai?

आप सभी को इस बात की जानकारी है कि हमारे हिंदू धर्म में सभी लोग सनातन संस्कृति से कहीं ना कहीं जुड़े हुए हैं 

और देश में अधिकतर लोग अपने इष्ट देव के रूप में भगवान श्री कृष्ण को ही पूजते हैं अर्थात उन्हीं की पूजा करते हैं। वैसे देश में सभी लोगों को अपने अपने इष्ट देव अपनी पसंद से पूजने की आजादी है।

यहां कोई अपने इष्ट के रूप में भगवान शिव की पूजा करता है कोई राम की कोई विट्ठल की कोई माता रानी की सब अपनी अपनी श्रद्धा से भगवान की पूजा करते हैं 

लेकिन सभी भगवान एक ही होते हैं। सबसे अधिक आज भारत के घरों में भगवान कृष्ण के बाल स्वरूप लड्डू गोपाल जी की पूजा की जाती है। भगवान श्री कृष्ण के जीवन से जुड़ी हुई बहुत थी।

 प्रसिद्ध रोचक घटना याद करके प्रतिवर्ष श्रीकृष्ण के जन्मदिन के दिन जन्माष्टमी का त्यौहार बड़ी धूम धाम से मनाया जाता है। कृष्ण जन्माष्टमी का उत्सव पूरे देश भर में देखने को मिलता है। 

सभी लोग जन्माष्टमी के दिन सुबह से लेकर रात्रि भगवान के जन्म होने तक मंदिरों में पूजा करते हैं भजन संकीर्तन आदि करते हैं।

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Bhagwan Shri Krishna Ka Janm Kab Hua Tha?

Bhagwan shri krishna ka janm: भगवान श्री कृष्ण का जन्म जब इस धरती पर अत्याचार बढ़ गया था और संपूर्ण पृथ्वी पर असुरों का राज हो गया अधर्म की हानि होने लगी, 

तब भगवान श्री कृष्ण ने माता देवकी के गर्भ से भाद्रपद मास की अष्टमी तिथि की रोहिणी नक्षत्र में रात्रि को 12:00 बजे प्रकट हुए थे। 

जन्म लेने के तुरंत बाद ही भगवान के आदेशानुसार वसुदेव जी भगवान कृष्ण को नंद बाबा के यहां पर छोड़ आए थे वहां पर इनका पालन-पोषण माता यशोदा ने किया था। इस तरह से भगवान श्री कृष्ण को दो-दो मां का प्यार मिला था।

Janmashtami Kya Hota Hai?

Janmashtami parv ka mahatva

जन्माष्टमी पर्व का बड़ा महत्व माना जाता है। इसका पूरा उत्साह देशभर में देखने को मिल सकता है। भगवान श्री कृष्ण के द्वारा महाभारत के युद्ध के दौरान गीता का प्रभावशाली उपदेश भी दिया गया था। 

उन्होंने अर्जुन को उपदेश देते हुए कहा कि “जब – जब धर्म की हानि होती है और इस पृथ्वी पर अधर्म अधिक बढ़ जाता है तब तक भगवान किसी न किसी रूप में इस धरती पर जन्म लेते हैं अर्थात तब तक मैं इस पृथ्वी पर जन्म लूंगा”

 इसीलिए कहा जाता है कि बुराई कितनी भी शक्ति शाली क्यों नहीं हो जाए लेकिन सच्चाई के आगे एक न एक दिन उसको हार माननी पड़ती है। सना तन धर्म में प्राचीन समय से आने वाली सभी पीढ़ियां अपने आराध्य देव के चुनाव को सही तरीके से जान पाए समझ पाए और भगवान श्री कृष्ण के द्वारा दिखाए गए मार्ग पर चलने का पूरा प्रयास करें।

 हिंदू धर्म में कृष्ण जन्माष्टमी पर्व का एक तरह से देखा जाए तो श्रीकृष्ण जन्माष्टमी हमारी सभ्यता और संस्कृति दर्शाती है युवा पीढ़ी को भारतीय सभ्यता संस्कृति का सामना सही तरीके से कराने के लिए ताकि युवा पीढ़ी इन संस्कारों से परे ना हो। इसलिए हमारे देश में व्रत और त्योहारों का बहुत महत्व होता है।

 उनमें से कृष्ण जन्माष्टमी का पर्व भी आता है भारत के अलग – अलग राज्यों में अलग – अलग प्रकार से मनाई जाती है देश के युवा वर्ग के बच्चे अगर त्योहारों के महत्व को सही तरीके से नहीं समझ पाएंगे, 

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तो वह संस्कृति को भी सही पहचान नहीं पाएंगे। इसीलिए समय – समय पर व्रत और त्योहारों का एक अलग ही महत्व होता है और बड़े उत्साह के साथ इनको मनाया जाता है।

Shri Krishna

Shri krishna ek margdarshak ke roop me

भगवान श्री कृष्ण के द्वारा अपने जीवन काल में बहुत की लीलाएं की गई थी इसीलिए वह एक मार्गदर्शक के रुप में भी जाने जाते हैं। 

भगवान कृष्ण की लीलाओं से पूरा अनुमान लगाया जा सकता है कि श्री कृष्ण भगवान निरंतर चलते रहने और धरती पर सही उद्देश्य की पूर्ति के लिए ही उन्होंने अवतार लिया था।

 जन्म लेने के साथ ही उन्होंने अनेकों राक्षसों का वध किया भगवान श्रीकृष्ण शक्तिशाली होने के बाद भी वह एक सामान्य मनुष्य की तरह जीवन जीते थे। 

भगवान श्री कृष्ण को प्रेम का भी प्रतीक माना गया है।सूफी संतों के द्वारा अनेक दोहों में राधा कृष्ण उनकी गोपियों के साथ की गई सभी लीलाओं का बहुत सुंदर चित्रण सुनने को मिलता है।

निष्कर्ष 

दोस्तों बहुत जल्द हमारे बीच Janmashtami आने वाली है तो आज के इस पोस्ट में हमने Janmashtami के ऊपर ही बात की है उम्मीद है आपको समझ आया होगा Janmashtami Kab Hai? और Janmashtami Kyu Manate Hai? In Hindi अगर आपको यह जानकारी पता थी तो कमेंट करके बताएं अगर आप कोई जानकारी अच्छी लगी हो तो प्लीज़ शेयर करें।

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