अब इंसान के दिमाग में चिप एलोन मस्क का ड्रीम प्रोजेक्ट क्या है,2022

Short info :– आपको बता दें कि एलन मस्‍क की कंपनी ब्रेन-चिप रिसर्च पर जोर शोर से जुटी है।और न्‍यूरालिंक जल्‍द ही इंसानी दिमाग पर परीक्षण शुरू करने की तैयारी कर रहा है।मस्क ने दावा किया जिसमें  दिमाग में चिप

कि छोटी सी ब्रेन चिप इंसान की जिंदगी में कई तरह के बदलाव लेकर आएगी दुनिया के सबसे अमीर इंसान एलन मस्‍क का ब्रेन-चिप रिसर्च वाला स्‍टार्टअप न्‍यूरालिंक जल्‍द ही

इंसानी परीक्षण शुरू करने की तैयारी कर रहा है,आपको बता दें कि इस चिप की मदद से पैरालसिस से पीड़ित इंसान अपने दिमाग से उंगलियों से ज्‍यादा तेज गति से स्‍मार्टफोन चला सकेगा।

न्यूरालिंक इससे पहले सूअर और बंदर पर इस चिप को आजमा जा चुका है। 9 साल के बंदर में चिप लगाई गई थी जिससे वो केवल माइंड से वीडियो गेम खेल पा रहा था।

जिसकी स्टार्टअप एलन मस्क ने इस स्टार्टअप को 2016 में सैन फ्रांसिस्को बे एरिया में शुरू किया था। इसके जरिए अल्जाइमर, डिमेंशिया और रीढ़ की हड्डी की चोटों जैसे न्यूरोलॉजिकल,

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अब इंसान के दिमाग में चिप

समस्याओं का इलाज करने में मदद करने के लिए मानव मस्तिष्क में एक कंप्यूटर इंटरफेस को प्रत्यारोपित करने का लक्ष्य है। आपको बता दें कि ये स्टार्टअप टेक्नोलॉजी का यूज करके ह्यूमन-AI सिम्बायोसिस बनाने की कोशिश कर रही है।

पिछले महीने एलन मस्‍क ने कहा था कि ह्यूमन पर इसका अर्ली ट्रायल 2022 में शुरू होगा मस्‍क का कहना है,इसके जरिए हमारे पास किसी ऐसे व्यक्ति को ताकत देने का मौका है,जो कि चल फिर नहीं सकता है। या फिर अपने हाथों से काम नहीं कर सकता है।

सिक्के के साइज का है,डिवाइज :-

मस्क ने क्लिनिकल ट्रायल डायरेक्टर की भर्ती निकाली है। इसमें वैसे कैंडिडेट की ज्वाइनिंग की जा रही है। जो मिशन को समझते हों और आगे के प्रयोग के लिए इच्छुक और उत्सुक हो कैंडिडेट इनोवेटिव डॉक्टर्स और टॉप इंजीनियर्स के साथ काम करेंगे।

इसके अलावा न्यूरालिंक के पहले क्लिनिकल ट्रायल पार्टिसिपेंट के तौर पर काम करने का भी मौका मिलेगा वहीं एलन मस्क का कहना है कि न्यूरालिंक डिवाइस सिक्के के आकार का है।

जिसे स्कल या खोपड़ी में लगाया जा सकता है। यह केवल एक डिवाइज लगाकर ब्रेन और स्पाइन की समस्या को आसानी से हल किया जा सकता है। एलन मस्क ने बताया कि भविष्य में आप मेमोरी को सेव या रिप्ले कर सकते हैं।

साथ ही नई बॉडी या रोबोट बॉडी में भी डाउनलोड किया जा सकता है। यह प्रयोग कितना असरदार होगा, यह इंसान के ट्रायल के बाद ही पता चल सकेगा।

एलन मस्‍क की कंपनी ब्रेन-चिप रिसर्च पर जोर शोर से जुटी है. न्‍यूरालिंक जल्‍द ही इंसानी दिमाग पर परीक्षण शुरू करने की तैयारी कर रहा है। मस्क ने दावा किया है कि छोटी सी ब्रेन चिप इंसान की जिंदगी में कई तरह के बदलाव लेकर आएगी

दुनिया के सबसे अमीर इंसान एलन मस्‍क का ब्रेन-चिप रिसर्च वाला स्‍टार्टअप (chip in human brain) न्‍यूरालिंक जल्‍द ही इंसानी परीक्षण शुरू करने की तैयारी कर रहा है।

Conclusion :-

एलॉन मुस्क ने इसके जरिए अल्जाइमर, डिमेंशिया और रीढ़ की हड्डी की चोटों जैसे न्यूरोलॉजिकल समस्याओं का इलाज करने में मदद करने के लिए मानव मस्तिष्क में एक कंप्यूटर इंटरफेस को प्रत्यारोपित करने का लक्ष्य है।

ये स्टार्टअप टेक्नोलॉजी का यूज करके ह्यूमन-AI सिम्बायोसिस बनाने की कोशिश कर रही है। पिछले महीने एलन मस्‍क ने कहा था कि ह्यूमन पर इसका अर्ली ट्रायल 2022 में शुरू हो सकती है।

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आइए जानते हैं,इस अनसुलझे रहस्य को की पहले मुर्गी आई या अंडा जानिए क्या है,सच

Short info :- आपको बता दें कि दुनिया में पहले मुर्गी आई या फिर अंडा इस सवाल का जवाब ब्रिटेन के शेफील्ड विश्वविद्यालय और वारविक विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने ढूंढा ही लिया।

आपने तो अक्सर अपने आसपास ये सवाल तो सुना ही होगा कि दुनिया में पहले मुर्गी आई या अंडा? इस सवाल का जवाब हमेशा से एक पहेली बनी हुई थी।

और कई बार तो लोगों के बीच इस सवाल को लेकर बहस भी हो जाती है। और इसी का जवाब वैज्ञानिकों ने ढूंढ लिया हैं। और वैज्ञानिक ने इस जवाब को तथ्यों के साथ पेश भी किया है। और इसके लिए उन्होंने हाई टेक कंप्यूटर का भी इस्तेमाल किया है।

पहले मुर्गी आई या अंडा?

इस सवाल का जवाब दोनों विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने अपने शोध में पाया कि दुनिया में पहले मुर्गी आई थी।

n मुर्गी आई या अंडा

और उन्होंने अपने शोध में ये भी पाया कि अंडे के व्हाइट वाले हिस्से में एक प्रोटीन होता है। जिसे ओवोक्लिडिन (OC-17) कहते हैं।

ये अंडे के निर्माण के लिए काफी महत्वपूर्ण होता है। जो गर्भवती मुर्गी के अंडाशय में पाया जाता है। इससे स्पष्ट हुआ कि पहले गर्भवती मुर्गी के अंडाशय मे ओवोक्लिडिन OC-17 प्रोटीन बना

और फिर इस प्रोटीन से अंडे का निर्माण शुरू हुआ। हालांकि, इस शोध में ये नहीं बताया गया है। कि आखिर प्रोटीन बनाने वाली ये मुर्गी दुनिया में सबसे पहले कैसे आई?

अंडा कैसे बना ?

इस सवाल को सुलझाने के लिए हाई टेक कंप्यूटर हेक्टर का इस्तेमाल किया गया। इस हाई टेक कंप्यूटर के जरिए अंडे के शेल के आणविक संरचना को ध्यान से देखा गया।

तो इसमें सामने आया कि OC-17 एक उत्प्रेरक की तरह काम करता है। जो मुर्गी के शरीर में कैल्शियम कार्बोनेट को केल्साइट में बदलता है।

इसी से अंडे की परत काफी सख्त बनती है,जो Yolk और चूजे (Chick) के विकास के लिए आवश्यक तरल प्रदार्थ को सुरक्षा प्रदान करता है।

शेफ़ील्ड विश्वविद्यालय के एक प्रोफेसर डॉ कॉलिन फ्रीमैन ने बताया कि हमेशा से कहा जाता था कि अंडा पहले आया परंतु अब वैज्ञानिकों ने साबित कर दिया है।

कि मुर्गी पहले आई थी। पहले प्रोटीन की पहचान की गई थी। और इसे अंडे के विकास से जोड़ा गया था,परंतु इसकी बारीकी से जांच करने के बाद हम समझ सकें।

कि आखिर ये प्रक्रिया कैसे नियंत्रित होती है। ये काफी दिलचस्प है,कि विभिन्न प्रकार की एवियन प्रजातियों में प्रोटीन की भिन्नता होती है जो कि समान कार्य ही करते है।

Conclusion :-

आपको बता दें कि इस शोध के सामने आने से वज्ञानिकों को उम्मीद है कि ये बड़ी उपलब्धि भविष्य में नई सामग्री विकसित करने में काफी मददगार साबित होगी।

हालांकि, ये आज भी अनसुलझी पहेली ही है। कि मुर्गी सबसे पहले कैसे आई? इसका जवाब तो आने वाले समय में ही पता चल पाएगा।

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